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एलआरडीएसएस अकेडेमिया इंडस्ट्री पार्टनरशिप वर्कशाप

ट्रांसपोर्ट मॉडल्स और सॉफ्टवेयर मॉड्यूल्स विकसित करने की प्रक्रिया आरंभ करने के लिए, विशेष रूप से भारतीय रेलवे की आवश्यकताओं के लिए  रेलवे स्टाफ कालेजवडोदरा में 8 और 9 अप्रैल, 2005 को दो दिवसीय वर्कशाप योजित की गई। वर्कशाप में आईआईटी-मद्रास, आईआईटी-बंबई, आईआईएम-अहमदाबाद, आईआईएम-लखनऊ के फैकल्टी और रिसर्च स्कॉलरों के साथ-साथ टेरी के प्रतिनिधियों सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में अग्रणी और वित्तीय संस्थानों जैसे नेस्कॉम, आईबीएम, इंफोसिस, टाटा इंफोटेक, एम्फेसिस, माइंडट्री, सी-डॅक, एचसीएल इंफोसिस्टम एवं आईडीएफस के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

वर्कशाप का समापन श्री एम.आर.रामाकृष्णन (प्रबंध निदेशक, क्रिस)  के भाषण से हुआ, जिन्होंने भारतीय रेलवे पर सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुए विकास और इस क्षेत्र में भावी योजनाओं के बारे में अपने विचार रखे।  इसके बाद एलआरडीएसएस परियोजना के दूसरे और तीसरे चरण में विकसित हुई सॉफ्टवेयर क्षमताओं और जिन क्षेत्रों में अभी काम बाकी है, के संबंध में प्रस्तुति दी गई। इसके पश्चात्, अकेडेमिया के प्रतिभागियों ने संबंधित क्षेत्रों में अपनी अनुसंधान क्षमताओं की प्रस्तुति दी।   विभिन्न आईआईटी और आईआईएम  में रेल संबंधी क्षेत्रों में चल रहे अनुसंधान कार्यों की भिन्नता और प्रकृति पर अधिकांश प्रतिभागी आश्चर्यचकित हुए बिना न रह सके।

LRDSS Team Develops Tools For Analysis of Multimodal Frieight Traffic on User Defined Corridors


LRDSS Team Develops Tools For Analysis of Multimodal Frieight Traffic on User Defined Corridors

 

वर्कशाप के दूसरे दिन के सत्र में प्रमुख सॉफ्टवेयर फर्मों के प्रतिनिधियों ने अपनी प्रस्तुतियां रखी। जिसकी शुरुआत क्षेत्रीय निदेशक (पश्चिम)/नेस्कॉम की प्रस्तुति से हुई और उसके बाद इंफोसिस, MPHASIS, टाटा इंफोटेक और सी-डॅक के प्रतिनिधियों ने संबंधित क्षेत्रों में किए जा रहे अपने कार्यों से संबंधित प्रस्तुति दीं।

वर्कशाप की मुख्य सिफारिशें :  

1.

आपसी समन्वय की इस प्रक्रिया को बनाए रखने और चलाए रखने की आवश्यकता है। वर्तमान में, अकेडेमिक संस्थान रेलवे से संबंधित अनेक अनुसंधान परियोजनाएं चला रहे हैं  और, अभी यह परियोजनाएं अनप्रोडक्टिव हैं। कुछ मामलों में वे भारतीय रेलवे के अधिकारियों से स्थानीय तौर पर कुछ औपचारिक फीडबैक लेते हैं, किंतु ऐसा बहुत कम ही होता है, यदि कोई हो, तो वे लाइवप्रॉब्लम्स पर काम करना बंद कर देते हैं ताकि भारतीय रेलवे उनका समुचित उपयोग कर सके।

  
2.

यह महसूस किया गया कि रेलवे स्टाफ कालेज में नियमित तौर पर, वार्षिक आधार पर आयोजित की जाने वाली ट्रांसपोर्ट रिसर्च वर्कशाप  का न केवल अच्छा उपयोग होगा बल्कि यह एक महत्वपूर्ण आयोजन भी हो सकता है।

  
3.

उद्योग समूह ने भी काम को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय रेलवे के साथ समन्वय में बहुत रूचि दिखाई। वास्तव में ऐसा प्रस्ताव रखा गया कि  नेस्कॉम, अकेडेमिक संस्थानों और भारतीय रेलवे का एक कंसोर्टियम बनाया जाए, जो रेल संबंधी परियोजनाओं पर कार्य करे।

  
4.

यह महसूस किया गया कि भविष्य में ऐसी वर्कशाप /सेमिनार में विभिन्न विभागों के उपयोगकर्ताओं को भी एक साथ शामिल किया जाए, जो अकेडेमिक संस्थानों / उद्योग क्षेत्र के चल रहे अनुसंधान कार्यों की सीधे उपयोग कर सकें और उनका लाभ उठा सकें।




Source : रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड) CMS Team Last Reviewed on: 01-02-2011  

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