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भारतीय रेल सम्मेलन संघ के कार्य
 
 
भा.रे.स.सं. द्वारा किए जाने वाले कार्यों की दो कोटियां हैं
 
 1. न्यूट्रल कंट्रोल संगठन
 

जैसा पहले बताया गया है कि 20वीं शताब्दी के आरंभ में भा.रे.स.सं. के अंतर्गत एक यात्रिक इंजीनियर्स समिति गठित की गई थी, जिसका काम वैगन/कैरिज के रखरखाव के सामान्य मानक निर्धारित करना था। यांत्रिक समिति की सिफारिशों के आधार पर वैगन और कैरिज के रखरखाव के मानकों को भा.रे.स.सं. कांफ्रेंस नियम क्रमशः भाग III और IV में शामिल के गए थे, जो अब पूरी भारतीय रेलवे पर लागू हैं।

आरंभ में इसकी शुरुआत का उद्देश्य था कि निजी स्वामित्व वाली रेलें इंटरचेंज किए जाने वाले वैगनों के निर्धारित रखरखाव मानकों का कड़ाई से पालन करें और यह भी सुनिश्चित करें कि जब वैगन को सिकलाइन अथवा कारखाने में भेजा जाए तो उसके स्वामित्व के बारे में ध्यान दिए बिना उसकी पूरी जांच की जाए। न्यूट्रल कंट्रोल संगठन को उसके परीक्षण के उच्च स्तर, भेदभाव के बिना और उद्देश्यपरक रिपोर्टें तथा सिकलाइन और कारखानों में गुणवत्ता नियंत्रण के लिए आवश्यक स्वतंत्रता को देखते हुए रेलवे के राष्ट्रीयकरण के बाद भी इस संगठन को बनाए रखा गया है।

यह कार्य(न्यूट्रल कंट्रोल परीक्षण) सफल रहा है और विभिन्न समितियों अर्थात् कुंजरु समिति, वांचू समिति, सीकरी समिति और रेल संरक्षा रिव्यू समिति ने परीक्षण के मानक की बहुत सराहना की है।

1969 से पहले, लगभग सभी इंटरचेंज प्वाइंटों पर न्यूट्रल कंट्रोल स्टाफ तैनात होता था, जो गाड़ियों का परीक्षण कार्य करता था। 1969 में यातायत की पद्धति में बदलाव आया और विचार किया गया कि यार्ड में परीक्षण के बजाय कारखानों/सिक लाइनों में चल स्टॉक परीक्षम पर अधिक बल दिया जाए। इस प्रकार यार्ड का परीक्षण केवल आठ मार्शलिंग यार्डों तक सीमित रह गया था। वर्ष 1992 में,  रेलवे बोर्ड ने न्यूट्रल कंट्रोल स्टाफ की समीक्षा की और यार्डों से न्यूट्रल कंट्रोल स्टाफ को हटाने के आदेश दे दिए ताकि कारखानों और सिक लाइनों में उनकी पुनः तैनाती की जा सके, जहां UIC बोगी वैगनों,  BOXN/BCN वैगनों, CRT और टैंक वैगनों का आरओएच किया जाता था।

वर्ष 1993 में  रेलवे बोर्ड ने न्यूट्रल कंट्रोल संगठन के कर्मचारियों की संख्या में कमी करने का विनिश्चय किया और न्यूट्रल कंट्रोल स्टाफ की स्वीकृत पद संख्या 560 से कम होकर 528 रह गई, क्योंकि C.P.T (रेलवे) के ईस्ट डॉक जंक्शन पर इंटरचेंज प्वाइंट बंद हो गया था। फलस्वरूप बोर्ड ने निर्णय लिया कि न्यूट्रल कंट्रोल स्टाफ केवल कारखानों और आरओएच डिपो में ही तैनात किया जाए और गैर-जरूरी सिक लाइनों में आरओएच के बिना न्यूट्रल कंट्रोल परीक्षण का कार्य रोक दिया जाए। स्वीकृत पद संख्या को 528 तक ले जाने का लक्ष्य 01.8.2007 तक प्राप्त कर लिया जाएगा।  

इस समय पूरी भारतीय रेलवे(अनुलग्नक-1) पर 33 कारखानों, 38 आरओएच डिपो में न्यूट्रल कंट्रोल स्टाफ तैनात है। 06 विभिन्न प्वाइंटों अर्थात् भा.रे.स.सं./मुख्यालय/नई दिल्ली (2 बैच) ANCO कार्यालय/मुंबई, पूर्व रेलवे के चित्तपुर और आंडाल, उत्तर रेलवे के खानआलमपुरा,  दक्षिण रेलवे के टोंडियारपेट, द.पू.रेलवे के भिलाई, प.म.रेसले के न्यू कटनी जं., ANCO कार्यालय/कोलकाता में नौ फ्लाइंग स्कवेड बैच काम कर रहे हैं। ये बैच भारतीय रेलवे पर ओरिजनेटिंग/टर्मिनेटिंग प्रीमियम एंड-टू-एंड और सी.सी. फ्रेट रेकों का नियमित तौर पर मासिक परीक्षण करते हैं और रेलवे बोर्ड के निर्देशानुसार, 07 स्टील प्लांटों अर्थात् पूर्व रेलवे पर दुर्गापुर एवं IISCO/हीरापुर, पूर्व तट रेलवे पर विशाखापत्तनम, द.पू.रेलवे पर टाटानगर, राउरकेला, बोकारो एवं IISCO/बुरुपुर और द.पू.म.रेलवे पर भिलाई के साथ वैगन इंटरचेंज संबंधी संयुक्त नमूना जांच का कार्य करते हैं।

पर्यवेक्षकों की अत्यधित कमी के कारण उपर्युक्त जांच कार्य केवल चार पर्यवेक्षकों द्वारा किया जा रहा है, ये चार पर्यवेक्षक ANCO कार्यालय/मुंबई, चित्तपुर/पूर्व रेलवे,  टोंडियारपुर/दक्षिण रेलवे और ANCO कार्यालय/कोलकाता में तैनात हैं।

इसके अतिरिक्त, समय-समय पर  रेलवे बोर्ड के आदेशानुसार विशेष जांचों/सर्वेक्षणों का आयोजन भी किया जाता है।

न्यूट्रल कंट्रोल परीक्षणों की उपयोगिता विभिन्न तरीकों से आवश्यक और अपरिहार्य बनकर उभरी है, क्योंकि कारखानों और आरओएच डिपो में अंतिम चरण में यातायात के उपयोग हेतु रिपेयर किए गए स्टॉक में न्यूट्रल कंट्रोल स्टाफ द्वारा चल स्टॉक में गंभीर असुरक्षित खराबियां पकड़ी गई हैं। न्यूट्रल कंट्रोल स्टाफ ऐसा असुरक्षित स्टॉक रिजेक्ट कर देता है और संरक्षा की दृष्टि से रेलवे का स्टाफ उन खराबियों को ठीक करता है।

न्यूट्रल कंट्रोल संगठन द्वारा सभी रेलों के मुख्य यांत्रिक इंजीनियरों और रेलवे बोर्ड के यांत्रिक और संरक्षा निदेशालयों को प्रस्तुत की जाने वाली तिमाही रिपोर्टें, कारखानों और सिक लाइनों में किए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता का एक महत्वपूर्ण गहन अध्ययन है, जिनसे कमियां उजागर होती हैं तथा स्थानीय तौर पर पास किए जाने वाले वैगनों का प्रतिशत, सामग्री की कमी और स्टाफ की लापरवाही आदि के कारण अटेंड नहीं किए गए संरक्षा उपकरणों की जानकारी मिलती है। यांत्रिक विभाग के प्रमुखों के साथ-साथ बोर्ड के यांत्रिक और संरक्षा निदेशालय निवारक कार्रवाई करने के लिए इन रिपोर्टों पर उचित ध्यान देते हैं।

 
2.भा.रे.स.सं. प्रधान कार्यालय
 
प्रधान कार्यालय की निम्नलिखित शाखाएं हैं:-
1.   इंटरचेंज सेक्शन Records pertaining to ownership of each मी.ला. वैगन on भारतीय रेलवेs, daily इंटरचेंज of मी.ला. वैगनs at all inter-रेलवे इंटरचेंज प्वाइंटs, daily वैगन balances, इंटरचेंज of वैगनs both मी.ला. and ब.ला. with बांग्लादेश and पाकिस्तान रेलवेs are maintained by भा.रे.स.सं.. मी.ला. वैगन census results are processed and finalized by it. These works in respect of ब.ला. वैगनs have, however, transferred to रेलवे बोर्डकंप्यूटर Cell in the year 1969 and are done there. The following work is done in भा.रे.स.सं. in this connection.
  . ओनरशिप रिकार्ड्स रेलवे wise records of each मी.ला. वैगन owned by भारतीय रेलवेs, type wise, are maintained in registers of भा.रे.स.सं.

Whenever any new वैगन is put on line or an existing वैगन is condemned, the concerned क्षेत्रीय रेलवे issues as addition or deletion advice and ownership records are updated accordingly. In order to ensure that no discrepancy creeps up in the ownership records, representatives of Chief Mechanical Engineers of all क्षेत्रीय रेलवेs are required to attend भा.रे.स.सं. periodically for reconciliation. Thus भा.रे.स.सं. is one Office where authentic and up to date information about रेलवे wise, type wise मी.ला. stock is available and is supplied by it to the बोर्डand क्षेत्रीय रेलवेs periodically.

  . वैगन गणना मी.ला. वैगन census is held every alternate year. क्षेत्रीय रेलवे feed the details of वैगनs enumerated over their Zone in their कंप्यूटरs and send the floppy discs to रेलवे बोर्डकंप्यूटर Cell. Parallel master data about वैगन ownership is maintained in रेलवे कंप्यूटर cell also. The information received from क्षेत्रीय रेलवेs through floppy discs is matched with the master data available in the रेलवे बोर्डकंप्यूटर and analyzed. The following information is generated.
i List of रेलवे वार, टाइप वार  वैगनs enumerated in their numerical order over a particular zone. Such lists are worked out of each क्षेत्रीय रेलवे.
ii List of Stock in existence but not enumerated anywhere.
iii Stock not in existence but enumerated.
iv Duplicate enumerations.

These statements are scrutinized with the records maintained in भा.रे.स.सं.. Representatives of all क्षेत्रीय रेलवेs are called to भा.रे.स.सं. office for reconciliation of census results and discrepancies mentioned above are sorted out.

List of भारतीय रेलवे वैगनs enumerated over पाकिस्तान and बांग्लादेश रेलवेs are also received directly by भा.रे.स.सं.. भा.रे.स.सं. also sends them the lists of their वैगनs enumerated in India. These are compared with our records. Discrepancies, if any, are sorted out in meetings with them.

After these reconciliation census results are finalized and issued by भा.रे.स.सं..

  . वैगन बैलेंस और किराया प्रभार इस समय 31-12-2007 को भारतीय रेलवे पर मी.ला. वैगनों की संख्या 7430=14283 है।  Daily Junction Returns are received in भा.रे.स.सं. from all inter रेलवे इंटरचेंज प्वाइंटs. These contain all the particulars of each वैगन इंटरचेंजd at that प्वाइंट on that day viz., वैगन number, type, owning रेलवे, Loaded or empty.

Based on these DJRs भा.रे.स.सं. staff work out the total number of वैगनs made over to, taken over from other adjoining रेलवेs by each रेलवे each day. They also workout वैगन balance for each रेलवे each day. वैगन balance is the net difference between the ownership and the actual holding of वैगनs of a क्षेत्रीय रेलवे, on a particular day. If a particular रेलवे holds less number of वैगनs than it owns on a particular day, it is entitles to किराया प्रभार for balance of the वैगनs. Conversely the रेलवे holding more वैगनs than its own is liable to pay किराया प्रभार for the excess number of वैगनs it holds.

4-व्हीलर वैगनों के संबंध में प्रति वैगन प्रति दिन किराया प्रभार की वर्तमान दरें इस प्रकार हैं :

  गैर-रेलवे उपयोगकर्ताओं के लिए भा.रे. के साथ समायोजन के लिए बांग्लादेश रेलवे के लिए पाकिस्तान रेलवे के लिए
बड़ी लाइन 424/-रु. 158/-रु. 266/-रु. 500/-रु.
मीटर लाइन 232/-रु. 102/-रु. 145/-रु. ----

ब.ला. और मी.ला. वैगनों के किराया प्रभार बिल भा.रे.स.सं. द्वारा जारी किए जाते हैं।  बड़ी लाइन  के मामले में रेलवे बोर्ड का कंप्यूटर सैल भा.रे.स.सं. को वैगनों के बैलेंस की सूचना देता है।  मीटर लाइन के मामले में इनकी गणना भा.रे.स.सं. के कार्यालय में ही की जाती है।

 

किराया प्रभार बिल सभी रेलों और यातायात लेखा कार्यालय, नई दिल्ली को भेजे जाते हैं, जो वास्तव में विभिन्न रेलों के बीच धनराशि का समायोजन करते हैं।

क्षेत्रीय रेलों के बीच मी.ला. स्टेशनों के इंटरचेंज प्वाइंटों का विवरण इस प्रकार है :

 

क्र.सं. इंटरचेंज प्वाइंट रेलवे
1. खंडवा द.म. एवं प.रे.
2. हिम्मतनगर प.रे. एवं उ.प.रे.
3. पूर्णिया पू.सी. एवं पू.म.रे.
4. फारबिसगंज पू.सी. एवं पूर्वो. रेलवे

अंतर्राष्ट्रीय रेलों के साथ इस समय ब.ला. के चार तथा मी.ला. के दो इंटरचेंज प्वाइंट हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है :-

बड़ी लाइन

रेलवे इंटरचेंज प्वाइंटों के नाम
भारतीय रेलवे एवं पाकिस्तान रेलवे अटारी (उत्तर रेलवे)
भारतीय रेलवे एवं बांग्लादेश रेलवे राणाघाट (पूर्व रेलवे)
>पतरापोल (पूर्व रेलवे)
>सिंहाबाद (पू.सी.रेलवे)

मीटर लाइन

भारतीय रेलवे एवं बांग्लादेश रेलवे राधिकापुर (पू.सी.रेलवे)
मसीहसन (बांग्लादेश रेलवे)

मालभाड़ा सेक्शन

यह सेक्शन वाणिज्य समिति के कार्यों का समन्वय करता है। वाणिज्य समिति में इस समय सभी रेलों के मुख्य वाणिज्य प्रबंधकों सहित गैर सरकारी रेलवे (कोंकण रेल निगम लि.रेलवे) का एक प्रतिनिधि शामिल है।  यातायात की बुकिंग अर्थात् वर्गीकरण, पैकिंग/भार की शर्तें, आरक्षण, रिफंड आदि के लिए नए नियम या वर्तमान नियमों में किन्हीं संशोधन के लिए रेलवे बोर्ड अथवा क्षेत्रीय रेलों द्वारा मुख्य वाणिज्य प्रबंधक के अनुमोदन से भा.रे.स.सं. को भेजे गए सभी प्रस्ताव भा.रे.स.सं. द्वारा प्रोसेस किए जाते हैं। जहां आवश्यक हो, सभी क्षेत्रीय रेलों, ट्रेड और इंडस्ट्री, विस्फोटक और रसायन निरीक्षकों की राय ली जाती है और सारा मामला वाणिज्य समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। क्षेत्रीय रेलों के दर प्रबंधकों की उप समिति इस समिति की सहायता करती है। दर प्रबंधकों की उप समिति की बैठकों में सभी प्रस्तावों की गहन जांच की जाती है, जो आगे वाणिज्य समिति की बैठकों में रखे जाते हैं। दर प्रबंधकों की उप समिति की सिफरिशों र वाणिज्य समिति विचार करती है और उन्हें बोर्ड के अनुमोदन हेतु भेजती है, किंतु ये प्रस्ताव सिफारिश के तौर पर भेजे जाते हैं, और कभी-कभी बोर्ड उन्हें स्वीकार नहीं करता।

 जनता को देय इंटर-रेलवे दायिता के निर्धारण के लिए वाणिज्य समिति  ट्रेफिक क्लेम आर्बिटरेशन की तरह भी काम करती है।

भा.रे.स.सं. का महासचिव वाणिज्य समिति के सचिव के समान और भा.रे.स.सं. कार्यालय इसके सचिवालय के समान कार्य करता है।

CT26 Pt.I Vol.I (नियम एवं विनियम) सामान्य नियम, अध्याय 25 Pt.I Vol.II (रियायत) , CT25 Pt.I Vol.III (पार्सल) आदि के शुद्धिपत्र जारी करने का कार्य, रेलवे बोर्ड की आवश्यकता पर इन पुस्तकों का मुद्रण और समय-समय पर सभी क्षेत्रीय रेलों को इनका वितरण।

GT 41 Pt.I Vol.I (सामान्य नियम) और GT 45 Pt.I Vol.II (वर्गीकरण) के शुद्धिपत्र जारी करने का कार्य, रेलवे बोर्ड की आवश्यकता पर इन पुस्तकों का मुद्रण और समय-समय पर सभी क्षेत्रीय रेलों को इनका वितरण।

प्रति वर्ष बजट के दौरान होने वाली घोषणा के अनुसार यात्री किरायों,  डिस्क्रिप्टिव गुड्स (मोटर कार) के लिए पार्सल दरों और मालभाड़ा दरों का मुद्रण तथा इन्हें 1 अप्रैल से कार्यान्वित किए जाने के लिए 31 मार्च से पहले सभी क्षेत्रीय रेलों को वितरित करना।

सामान्य नियमों के साथ मिलिट्री टैरिफ आदि पुस्तकों की रेलवे बोर्ड द्वारा आवश्यकता होने पर इनका  मुद्रण और समय-समय पर सभी क्षेत्रीय रेलों को इनका वितरण।

क्षेत्रीय रेलों के अनुरोध पर रेलवे स्टेशनों और प्राइवेट साइडिंगों के कोड आबंटित करना और अल्फाबेटिकल-बुक और शुद्धि पत्र को सभी क्षेत्रीय रेलों को वितरित करना।

सर्वे ऑफ इंडिया, देहरादून से प्राप्त होने पर क्षेत्रीय रेलों की आवश्यकतानुसार रेलवे मानचित्र (हिंदी एवं अंग्रेजी) की सप्लाई करना।

रेलवे स्टेशनों,  साइडिंगों और आउट एजेंसियों के कोडों का संकलन और उनका मुद्रण।

खतरनाक वस्तुओं के संबंध में नियम बताने वाली रैड टैरिफ बुक का मुद्रण एवं शुद्धि पत्र आदि जारी करना और रेलवे बोर्ड की आवश्यकता पर इन पुस्तकों का मुद्रण और समय-समय पर सभी क्षेत्रीय रेलों को इनका वितरण।

राजधानी और शताब्दी गाड़ियों के लिए प्वाइंट-टू-प्वाइंट किराया तालिका का मुद्रण एवं वितरण।




Source : रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड) CMS Team Last Reviewed on: 13-01-2016  


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