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आईआरसीए

 

होम | संगठन | कार्य | किराया प्रभार-एम जी | किराया प्रभार-बी जी | वित्त | प्रकाशन

इतिहास

भारतीय रेल सम्मेलन संघ 1902 में स्थापित हुआ था। उस समय  रेलवे नेटवर्क में 19 निजी रेलवे प्रणालियां कुल 8,475 मील लंबें रेलमार्गों पर अलग-अलग काम करती थीं। प्रत्येक कंपनी ने यात्रियों के आने-जाने और माल की बुकिंग के लिए अपने-अपने नियम और विनियम बना रखे थे। इन नियमों में भिन्नता के कारण उपयोगकर्ताओं को बहुत असुविधा होती थी।  नियमों और विनियमों के अलग-अलग होने की समस्या से उबरने और मालडिब्बों के एक रेलवे से दूसरी रेलवे पर आवागमन के संबंध में नियम बनाने के लिए 1902 में भारतीय रेल सम्मेलन संघ की स्थापना की गई। आरंभ में संघ का गठन यातायात की बुकिंग रेलों के बीच गाड़ियों के इंटरचेंज के संबंध में नियम एवं विनियम बनाने,  एक परामर्शदात्री समिति और बोर्ड ऑफ आर्बिटरेशन के रूप में कार्य करने के लिए हुआ था। इसके अलावा,  मालडिब्बों के अनुरक्षण और वर्गीकरण के लिए सामान्य मानक निर्धारित करने के लिए समितियां बनाई गईं और 1926 के आते-आते यह विनिश्चय किया गया कि भारतीय रेस सम्मेलन संघ के अधीन सभी क्षेत्रों को कवर करते हुए स्थायी समितियां और तकनीकी सेक्शन बनाए जाएं।  तकनीकी सेक्शनों के अंतर्गत निम्नलिखित समितियां हैं :

1. यांत्रिक  इंजीनियरी समिति.
2.  बिजली इंजीनियर समिति
3. सिविल इंजीनियरी समिति
4. सिगनल इंजीनियरी समिति
5. मेटलर्जिकल एंड केमिकल इंजीनियरी समिति.
इस प्रकार 1926 से 1946 के बीच रेलवे के कार्यों का कोई व्यावहारिक पहलू नहीं था, जिस पर आई.आर.सी.ए. की मुहर लग पाती।
 

2.  हालांकि, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, कंपनी के प्रबंधन के अधीन प्रमुख रेलें सरकार के अधीन आ गई थीं और स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जो रेलें पहले भारतीय राज्यों के अधीन हुआ करती थीं, पर भी सरकार का आधिपत्य हो गया। अब चूंकि लगभग सभी राज्यों के अधीन काम करने वाली रेलें और उनका प्रबंधन एक प्राधिकरण, अर्थात् रेलवे बोर्ड के अधीन आ चुका था, अतः आई.आर.सी.ए. को पुनःसंगठित करना पड़ा और उसका कार्यक्षेत्र कम हो गया। रेलवे बोर्ड में कंप्यूटर स्थापित हो जाने के बाद बड़ी लाइन के वैगनों के इंटरचेंज संबंधी रखरखाव का कार्य वर्ष 1969 में रेलवे बोर्ड के पास आ गया। मीटर लाइन वैगनों से संबंधित कार्य आई.आर.सी.ए. द्वारा ही किया जाता रहा।

 

3.आई.आर.सी.ए. की स्थिति के संबंध में पुनर्परीक्षण : आई.आर.सी.ए. के कार्य का एक बड़ा हिस्सा रेलवे बोर्ड को चले जाने के बाद, आई.आर.सी.ए. के कार्य को समेटे जाने का प्रश्न 1947 से ही बार-बार रेलवे बोर्ड और अन्य फोरमों के समक्ष उठता रहा है। इस बारे में बहुत सोचा जाता रहा है कि आई.आर.सी.ए. का मुख्य कार्य अर्थात् विभिन्न मुद्दों पर विभिन्न रेलों के बीच समन्वय का कार्य करना रेलवे बोर्ड द्वारा अपने हाथ में लिया जा रहा है, और आई.आर.सी.ए. अपनी उपयोगिता खो चुका है। 1947 से 2002 तक इस विषय पर अनेक बार बहस हुई है और हर बार यह निर्णय लिया जाता रहा है कि इस संगठन को चलाए रखा जाए, क्योंकि यह महसूस किया गया है कि यह अपनी स्वतंत्र स्थिति के तहत उपयोगी कार्य कर रहा है।

 
4. वर्तमान स्थिति : इस समय सभी क्षेत्रीय रेलों सहित मुंबई पोर्ट ट्रस्ट, कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट, चेन्नई पोर्ट ट्रस्ट, दिल्ली मेट्रो रेल निगम, कोंकण रेलवे और पिपावाव  रेलवे निगम आई.आर.सी.ए. से जुड़े हैं।
 
5. महाप्रबंधक, उत्तर रेलवे, जो आई.आर.सी.ए. के पदेन अध्यक्ष भी हैं, और राज्यों के स्वामित्व वाली दो रेलों के महाप्रबंधक और एक गैर-सरकारी रेलवे के महाप्रबंधक आई.आर.सी.ए. की कार्यकारी समिति के सदस्य हैं।
 
वर्तमान सदस्यों का विवरण इस प्रकार है :
 
1. अध्यक्ष श्री विवेक सहाए
2. सदस्य श्री आशुतोष स्वामी
3. सदस्य श्री आर. एन. वर्मा
4. सदस्य श्री पी. वेंकतेश्वर्लू
5. सचिव श्री आर. एम. छाबड़ा

 




Source : रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड) CMS Team Last Reviewed on: 18-04-2018  

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